जमशेदपुर : टाटा वर्कर्स यूनियन द्वारा स्पोटर्स एडवाइजरी कमेटी को 80 हजार रुपये फंड के रुप में देने को लेकर जारी सरकुलर को लेकर विरोध तेज हो गया है. इस विरोध के बीच यूनियन के उपाध्यक्ष सह स्पोटर्स एडवाइजरी कमेटी के पदाधिकारी संजय सिंह ने इस फैसले को वापस लेने की अपील की है. दरअसल, सोशल मीडिया में यह कहा जा रहा है कि उक्त पैसे से कमेटी के लोग मौज मस्ती करेंगे. इसको लेकर टीका टिप्पणी से आहत होकर संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर ही इसको लेकर अध्यक्ष और महामंत्री से अपील की है. उन्होंने कहा है कि हाल ही में टाटा वर्कर्स यूनियन द्वारा जारी एक सर्कुलर के आधार पर सोशल मीडिया और कुछ समूहों में स्पोर्ट्स फंड को लेकर जो दुष्प्रचार फैलाया जा रहा है, वह पूरी तरह भ्रामक, तथ्यहीन और संगठन की मर्यादा के विपरीत है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि स्पोर्ट्स से जुड़ा हर एक खर्च यूनियन के सामान्य कमेटी मेंबर फंड पर होता है, न कि स्पोटर्स एडवाइजरी कमेटी के किसी भी सदस्य पर होता है. टाटा वर्कर्स यूनियन की स्पोर्ट्स टीम में चुने गए खिलाड़ियों को पिछले 12 वर्षों से केवल दो प्रकार की सुविधा दी जाती रही है. एक नाश्ता और दूसरा स्पोर्ट्स ड्रेस या किट. इसके अलावा कुछ नहीं दिया जाता है. इसके अतिरिक्त किसी भी सदस्य या अधिकारी को कभी कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं दिया गया है. (नीचे भी पढ़ें)
संजय सिंह ने कहा है कि दुर्भाग्य की बात है कि पिछले 12 साल की सम्मानित परंपरा को राजनीति के कारण तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है और उनके ऊपर अनुचित आरोप लगाए जा रहे हैं. सिर्फ इसलिए क्योंकि वे इस समय स्पोटर्स एडवाइजरी कमेटी का लीड कर रहे है. उन्होंने एक बार फिर से स्पष्ट किया है कि जारी किया गया सर्कुलर गलत तरीके से प्रस्तुत हुआ है. इसमें स्पोर्ट्स गतिविधियों और फंड उपयोग को जिस ढंग से दिखाया गया है, उसने अनावश्यक भ्रम खड़ा किया है. इस सर्कुलर का उपयोग कुछ लोग व्यक्तिगत बदनामी और गलत प्रचार के लिए कर रहे हैं. टाटा वर्कर्स यूनियन की खेल से जुड़े काम संस्कृति अनुशासन, पारदर्शिता और टीम भावना पर आधारित है. यह संगठन की गरिमा के खिलाफ है कि बिना तथ्य जाने गलत बातें फैलाई जाएं.



