
संतोष वर्मा
चाईबासा : बुधवार को प्रशिक्षु आइएएस सह अनुमंडल पदाधिकारी, सदर दिनेश कुमार यादव के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा के मद्देनजर, दुकान की साफ-सफाई, खाने की गुणवत्ता, दुकान के रसोई की स्थिति इत्यादि की जांच की गई. छापेमारी दल में प्रमुख रूप से प्रशिक्षु आइएएस सह अनुमंडल पदाधिकारी, सदर दिनेश कुमार यादव, कार्यपालक दंडाधिकारी जितेंद्र यादव तथा खाद्य सुरक्षा अधिकारी संजीत घोष मौजूद रहे. खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 के तहत सभी छोटे या बड़े व्यापारी को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआइ) से पंजीकृत या लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है. छोटे व्यापारी जिनका सालाना टर्न ओवर 12 लाख रुपए से कम है. उनको पंजीकरण करवाना है, जिसका शुल्क 100 रुपये प्रति वर्ष है तथा वैसे व्यापारी जिनका सालाना आय 12 लाख रुपए से अधिक है, उन्हें लाइसेंस लेना है, जिसका शुल्क 2,000 रुपये प्रतिवर्ष है. कोई भी व्यक्ति चाहे वह पानीपुरी बेचता हो, चाय बेचता हो या कोई होटल या कोई बड़ा रेस्टोरेंट चलाता हो उसे से लाइसेंस-पंजीकरण करवाना अनिवार्य हैं. साथ ही साथ खाद्य स्थल में सफाई के शिड्यूल-4 के तहत साफ-सफाई रखना अनिवार्य हैं तथा ऐसा कोई भी वस्तु खाद्य पदार्थ में ना मिलाया या बेचा जाए जिससे व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान हो ऐसा नहीं करने पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2006 के तहत दुकानदार को 10 लाख तक का जुर्माना या 3 साल तक का कारावास देने का प्रावधान हैं.

छापेमारी के दौरान जांच के क्रम में दुकानों में गंदगी पाई गई खाने की वस्तुओं में साफ सफाई की कमी पाई गई जिसके एवज में नीनु नन्दी, देवाशीष सामड तथा प्रेम सिंह कुंकल नामक दुकानदारों को 200 रुपये का फाइन काटा गया दुकानों में साफ-सफाई नहीं रखने के कारण सदर अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा बेहद नाराजगी दिखाई गई तथा चेतावनी दी गई की दुकानों का पंजीकरण तथा लाइसेंस शीघ्र बनवा ले और साफ सफाई का विशेष रूप से ध्यान रखें ताकि किसी भी ग्राहक का सेहत को किसी प्रकार का कोई नुकसान ना हो अन्यथा अगली बार दुकानों में गंदगी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जाएगी.







