
जमशेदपुर : चोट लगने के बाद व्यक्ति को अस्पताल ले जाने से पहले किए जाने वाले प्राथमिक उपचार के बारे में रविवार को पुलिस जवानों को ट्रेनिंग दी गई. यह ट्रेनिंग जमशेदपुर सोसायटी ऑफ एनेसथीसीओलाजिस्ट्स की ओर से 25 पुलिस जवानों को बिष्टुपुर थाना परिसर स्थित मल्टी परपस हॉल में दी गई, जिसमें टीएमएच, एमजीएम और ब्रह्मानंद अस्पताल के पांच डॉक्टर उपस्थित रहे. इस दौरान जवानों को यह बताया गया की अगर कोई भी व्यक्ति अचेत अवस्था में पड़ा है या फिर वह किसी दुर्घटना का शिकार हो गया है तो एक फर्स्ट रिस्पोंडर के नाते पुलिस को क्या करना चाहिए. पीड़ित को किस तरह प्राथमिक उपचार देना चाहिए ताकि उसकी जान को बचाया जा सके. उन्हें बताया गया कि फर्स्ट एड पूर्ण चिकित्सा नहीं होती, लेकिन इससे अस्पताल ले जाने के लिए रोगी की स्थिति को बेहतर किया जा सकता है. अस्पताल ले जाते समय या मदद का इंतज़ार करते समय किसी व्यक्ति को प्राथमिक चिकित्सा देने से उसकी जान बच सकती है. आपातकालीन स्थिति में कुछ आसान तकनीकों और बहुत कम उपकरणों का इस्तेमाल करके किसी को प्राथमिक चिकित्सा देने के लिए विशेष ट्रेनिंग की आवश्यकता नहीं है. यह आसानी से सीखा जा सकता है.
उन्हें बताया गया कि कभी आपातकालीन स्थिति में किसी को फर्स्ट एड देने की आवश्यकता पड़ती है, तो हो सके तो घायल व्यक्ति के खून, लार और अन्य शारीरिक तरल पदार्थों से दूर रहें. अगर ऐसा संभव न हो, तो अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए दस्ताने पहनें. प्राथमिक चिकित्सा देने के बाद, हमेशा हाथ अच्छी तरह से धोएं और अपनी आंखों, नाक या मुंह को हाथ न लगाएं. इसके साथ-साथ प्राथमिक चिकित्सा देने के बाद बिना हाथ धोए खान-पान न करें. ट्रेनिंग के दौरान ही सभी को प्रशिक्षण दिया गया. जानकारी देते हुए बिष्टुपुर थाना प्रभारी विष्णु प्रसाद राउत ने बताया कि यह ट्रेनिंग जवानों के लिए बहुत जरूरी थी. यह किसी व्यक्ति की जान भी बचा सकता है. घटनास्थल पर पहले या तो पुलिस पहुंचती है या फिर मीडिया वाले. इसलिए यह ट्रेनिंग पुलिस के अलावा मीडिया वालों के लिए भी जरूरी है. इस ट्रेनिंग ले लिए उन्होंने टीम को धन्यवाद दिया.





