
जमशेदपुर : देश में झारखंड की साइबर अपराधियों की राजधानी के रुप में विकसित हो चुके जामताड़ा के बराबर का साइबर अपराधियों का नेटवर्क जमशेदपुर में बनता जा रहा है. हालात यह है कि सिर्फ नौ माह में 14 साइबर अपराधियों को पुलिस ने जेल भेजा है. इन 14 लोगों की ओर से करीब 4000 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गयी है. जमशेदपुर में 16 साल से 30 साल तक के युवा करोड़ों रुपये की ठगी कर चुके है. ऐसे 14 साइबर ठग को गिरफ्तार कर जेल भेजा है, जिसकी एक से बढ़कर एक साइबर ठगी की कहानियां सामने आ चुकी है. हालात तो यह है कि कोल्हान के डीआइजी राजीव रंजन सिंह और जमशेदपुर के एसएसपी डॉ एम तमिल वाणन का भी फेक फेसबुक एकाउंट भेजकर ठगी करने की कोशिश की जा चुकी है और अब तक पुलिस ऐसे अपराधियों तक नहीं पहुंच पायी है. साइबर ठगों के अलग-अलग गैंग युवाओं ने बनाया है, जो देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों को इसके माध्यम से ठग दे रहे है. इस पूरे गैंग में राहुल केसरी का कहीं न कहीं हाथ था, जो युवाओं को ट्रेनिंग दी, जिसके बाद ये सारे युवा ट्रेनिंग लेकर स्टील सिटी को ठगी का फैक्ट्री बना दिया और यहां बैठकर देश और दुनिया में कंपनियां संचालित कर दिया. पिछले दिनों पकड़े गये राहुल केसरी ने तो अपनी कंपनी लंदन से रजिस्ट्रेशन करा लिया था और 39 लाख रुपये जमा किये थे. कंपनी का टर्नओवर 3500 करोड़ रुपये के करीब रखा था और कई बार बैंकॉक और लंदन जैसे देशों का दौरा कर चुका था. इस मामले में पुलिस ने पहले परसुडीह के नामोटोला से रंजन मिश्रा को गिरफ्तार किया था, जिसको बाद में उत्तर प्रदेश की पुलिस लेकर चली गयी. महेश पोद्दार को भी गिरफ्तार किया गया था, जिसने दो साल में दस करोड़ रुपये की ठगी कर ली थी. इसके अलावा नवंबर माह में ही जगजीत सिंह, रिशव भारती, दिलप्रीत सिंह सवींद्र सिंह, विकास तिवारी को गिरफ्तार किया गया था, जो सिदगोड़ा और गोलमुरी क्षेत्र का रहने वाले है जबकि गोलमुरी के रहने वाले कुलजीत सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है. इस मामले में पुलिस को इस गिरोह के मोहम्मद आरीफ और अवतार सिंह को गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा है.




