
जमशेदपुर : अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद की ओर से मैथिली के ख्याति प्राप्त लेखक व पत्रकार राजनंदन लाल दास के निधन पर ऑनलाइन शोकसभा का आयोजन किया गया । उक्त कार्यक्रम में उद्घाटन वक्तव्य देते हुए अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद के संस्थापक व राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉक्टर धनाकर ठाकुर ने कहा कि राजनंदन लाल दास मैथिली के अनन्य सेवक थे। उनके संपादन में कोलकाता से 39 वर्षों तक मैथिली पत्रिका ‘कर्णामृत’ का प्रकाशन होता रहा है, जो गौरव की बात है। उनके जीवन यात्रा पर व्याख्यान देते हुए कोलकाता के प्रख्यात साहित्यकार लक्ष्मण झा ‘सागर’ ने कहा कि 87 वर्षीय स्वर्गीय दास का जन्म 5 जनवरी 1934 को दरभंगा जिला के घनश्यामपुर- गोनोन में हुआ था। वे 1960 ईस्वी में कोलकाता विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान विभाग में एम.ए. करने के बाद एक निजी कंपनी में मार्केटिंग विभाग में कार्य करने के साथ ही मैथिली सेवा कार्य भी प्रारंभ कर दिए थे। मैथिली सेवा के लिए उन्होंने कोलकाता में कर्णगोष्ठी संस्था स्थापित कर उसके तहत त्रैमासिक मैथिली पत्रिका का प्रकाशन 1981 से 2019 तक किए । उनका निधन 4 जुलाई को हुआ। उन्हें पांच बेटियां थी जिनमें दो आजन्म अविवाहित रहकर अपने माता-पिता की सेवा के साथ उनके साहित्य कार्यों में सहयोग करने के हेतु संकल्पित होकर एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। (नीचे भी पढ़ें)
राजनंदन लाल दास के साहित्यिक योगदान पर व्याख्यान देते हुए साहित्य अकादमी के मैथिली प्रतिनिधि डॉ अशोक अविचल ने कहा कि स्व. दास की पहली कीर्ति 1970 में ‘संतो’ नाटक प्रकाशित हुई ।उनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हैं जिनमें चित्रा विचित्रा, मैथिलीक विकासमे कर्णगोष्टीक योगदान ,भोला लाल दास, मुंशी रघुनंदन लाल दास, डॉ प्रवोध नारायण सिंह पर मोनोग्राफ आदि प्रकाशित हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी जो भी कृतियां अप्रकाशित है, उसका किसी तरह प्रकाशन हो जाए, इस दिशा में वे हर संभव प्रयास करेंगे। कार्यक्रम में डॉक्टर कमल कांत झा, डॉक्टर अनमोल झा, डॉक्टर बैद्यनाथ झा, कुमार किसलय, अरुण पाठक आदि ने भी अपना संस्मरण सुनाया। ऑनलाइन संगोष्ठी का संयोजन एवं संचालन अंतरराष्ट्रीय मैथिली परिषद के अध्यक्ष डॉ. रवीन्द्र कुमार चौधरी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन परिषद के महासचिव पंकज कुमार झा ने किया। संगोष्ठी में कमल कांत झा, दिलीप कुमार झा, रमाकांत राय रामा, शशि भूषण झा नागदह, सुप्रिया दास, प्रमोद कुमार झा आदि मुख्य रूप से शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि दिया। कार्यक्रम के अंत में 2 मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति हेतु ईश्वर से प्रार्थना किया गया। शोक सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि राजनंदन लाल दास पर एक स्मृति पुस्तक निकलवाया जाए। साथ ही साहित्य अकादमी की ओर से उन पर मोनोग्राफ प्रकाशित हो, ताकि उनकी मैथिली सेवा कार्यों को युग- युग तक स्मरण किया जाता रहे।






