जमशेदपुर : झारखंड में जेपीएससी परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता को लेकर छात्रों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन को अब व्यापक सामाजिक समर्थन मिलने लगा है. झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन – जेएचआरसी ने छात्रों के आंदोलन एवं उनकी सभी मांगों का पूर्ण समर्थन करते हुए राज्य सरकार से अविलंब जेपीएससी परीक्षा को रद्द करने तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है. संगठन की एक अहम बैठक केंद्रीय अध्यक्ष मनोज मिश्रा की अध्यक्षता मे साकची मे संपन्न हुई. बैठक मे जेएचआरसी प्रमुख मनोज मिश्रा ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि छात्रों की मांगों की लगातार अनदेखी की गई और सरकार ने शीघ्र कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो वे जमशेदपुर में छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठने के लिए विवश होंगे. इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी. मानवाधिकार सम्मेलन के प्रमुख मनोज मिश्रा ने जारी बयान में कहा कि राज्य के हजारों प्रतिभाशाली युवाओं ने वर्षों की कठिन मेहनत और अथक परिश्रम के बाद इस परीक्षा में भाग लिया है. यदि परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और बड़ी संख्या में अभ्यर्थी निष्पक्षता पर संदेह जता रहे हैं, तो सरकार का संवैधानिक और नैतिक दायित्व है कि वह मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र एवं निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराए. उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं के विश्वास से बड़ा कोई मूल्य नहीं होता. (नीचे भी पढ़ें)
उन्होंने सरकार से मांग की कि छात्रों की सभी न्यायोचित मांगों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लिया जाए, छात्र अपना हक मांग रहें है, भीख नहीं. जेपीएससी परीक्षा को रद्द कर नई एवं पूर्णतः पारदर्शी परीक्षा आयोजित की जाए तथा पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराई जाए, ताकि राज्य की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में युवाओं का विश्वास पुनः स्थापित हो सके. उन्होंने कहा कि झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन – जेएचआरसी लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से छात्रों के न्याय की लड़ाई में उनके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा तथा युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संवैधानिक और लोकतांत्रिक मंच पर संघर्ष जारी रखेगा. अंत में संगठन ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं संबंधित अधिकारियों से अपील की कि वे छात्रों के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तत्काल हस्तक्षेप करें, निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें तथा न्याय, पारदर्शिता और योग्यता आधारित चयन प्रणाली को पुनर्स्थापित करने के लिए ठोस कदम उठाएं. बैठक में मनोज मिश्रा के साथ किशोर वर्मा, रेणु सिंह, सलावत महतो, अभिजीत चंदा, ऋषि गुप्ता, एसके बसु, रिया बनर्जी, जसवंत सिंह, श्याम लाल, हरदीप सिद्दू, डाक्टर शीतल पाण्डेय, अनीमा दास, देवाशीष दास, शुभश्री दत्ता सहित काफ़ी संख्या में सदस्य उपस्थित थे.




