रांची : झारखंड में इन दिनों हाथी का कहर लोगों पर बरपा है. झारखंड में पिछले पांच सालों में होथी ने अब तक 2479 से भी अधिक लोगों की जान ली है. वहीं अब तक 1300 से अधिक हाथी मारे भी गए है. वहीं हाल में पूर्वी सिंहभूम जिले के नीमडीह प्रखंड के हुटू गांव में 87 वर्षीय श्याम गोप को हाथियों ने कुचलकर मार डाला था. वहीं बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड के धुमरा पहाड़ की तलहटी स्थित अंबाटांड़ गांव में अपुरगिया देवी नामक 74 वर्षीय महिला को हाथियों ने कुचल कर मार दिया था. वर्ष 2009-10 के बीच 835 लोगों को हाथियों ने मार डाला है. 2000 के बाद से अब तक 1480 से अधिक लोगों की जान हाथी के कुचलने से जा चुकी है. इसमें अब तक 92 हार्थियों की जान जा चुकी है. आजादी के बाद सरकारी मुआवजे के बात करें तो 17 करोड़ रुपए सरकार द्वारा बांटे जा चुके है. वहीं इसे लेकर झारखंड एसोसिएशन ने हाथियों के आतंक से तंग आकर ग्रीन ट्रिब्यूनल से न्याय की गुहार लगाई है. (नीचे भी पढ़ें)
वहीं दूसरी ओर इस दौरान कोल्हान के ग्रामीण इलाकों में लगातार हाथियों के हमले बढ़ रहे है. कही ग्रामीणों की फसल को हाथियों द्वारा नष्ट किया जा रहा है तो कहीं उसके झोपड़ी नुमा घर में तबाही मचाई जा रही है. वहीं मंगलवार को चंदवा में हाथियों ने 28 घरों में उत्पात मचाया हुआ है. वहीं उसकी खेतों को भी नष्ट कर दिया है. (नीचे भी पढ़ें)
झारखंड में बीते पांच सालों की गणना के मुताबिक हाथियों की संख्या कम- गणना 2017 की बात की जाए तो हाथियों की संख्या 688 थी. वहीं इस 2022 की गणना की बात की जाए तो इसकी संख्या घटकर 555 हो गयी है. वहीं झारखंड में जंगली हाथियों की कुल संख्या 11 प्रतीशत है.
सरकार की ओर इन्हें दिया जाता है मुआवजा-
मनुष्य की मृत्यु पर- चार लाख
गंभीर रूप से घायल होने पर- एक लाख
फसल की क्षति पर- 20 से 40 हजार
साधारण घायल होने पर- 15 हजार रुपए
स्थायी रूप से अपंग होने पर- दो लाख
पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त मकान का- 1.30 लाख
गंभीर रुप से क्षतिग्रस्त मकान, पक्का- 40 हजार
साधारण रुप से क्षतिग्रस्त मकान, कच्चा- 20 हजार
भंडारित अनाज, प्रति क्विंटल- 1600 रुपए, अधिकतम 8 हजार
भैंस, गाय व बैल की मृत्यु पर- 15 से 30 हजार
बछड़ा—बाछी की मौत पर- 5 हजार. (नीचे भी पढ़ें)
जाने किस वर्ष कितने लोगों को हाथियों ने कुचल कर मार डाला-
2009-10 में 54, 2010-11 में 69, 2011-12 में 62, 2012-13 में 60, 2013-14 में 56, 2014-15 में 53, 2015-16 में 66, 2016-17 में 59, 2017-18 में 84, 2018-19 में 87, 2019-20 में 84, 2020-21 में 97, 2021-22 में 83, 2022-23 में 47 को अपना शिकार बनाया है.





