जमशेदपुर : जमशेदपुर के बारीडीह स्थित मर्सी अस्पताल के प्रबंधन एवं चिकित्सकों पर इलाज में लापरवाही बरतने, गंभीर स्थिति में नवजात को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराने और एंबुलेंस की समुचित व्यवस्था नहीं करने का आरोप लगा है. इस संबंध में बागबेड़ा क्षेत्र के निवासी राजेश सांडिल ने झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी को लिखित शिकायत सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय चिकित्सकीय जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की है. शिकायतकर्ता राजेश सांडिल के अनुसार, उनकी पत्नी नूपुर भंडारी गर्भवती थीं और मर्सी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था. उन्होंने बताया कि 3 अगस्त 2026 को शाम करीब छह बजे पत्नी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनके मुताबिक, भर्ती के समय पत्नी की स्थिति सामान्य थी, लेकिन लगभग 30 मिनट बाद बीपी की दवा दिए जाने के पश्चात उनकी हालत बिगड़ने लगी. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि बीपी की शिकायत नहीं होने के बावजूद दवा दी गई और दवा के संबंध में पूछने पर उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई. राजेश सांडिल का कहना है कि पत्नी की स्थिति गंभीर होने पर ऑक्सीजन की आवश्यकता थी, लेकिन उस समय अस्पताल में ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं थी. उसी रात करीब 9:30 बजे ऑपरेशन के बाद उनकी पत्नी ने एक बच्ची को जन्म दिया. शिकायत के अनुसार, प्रसव के बाद मां और नवजात दोनों की स्थिति गंभीर हो गई. (नीचे भी पढ़ें)
नवजात को टीएमएच रेफर करने के बावजूद एंबुलेंस व्यवस्था पर सवाल : शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि नवजात की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सक ने उसे बेहतर इलाज के लिए जमशेदपुर स्थित टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) रेफर किया और आधे घंटे के भीतर वहां पहुंचाने की सलाह दी. राजेश सांडिल के अनुसार, उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से एंबुलेंस, ऑक्सीजन तथा डॉक्टर और नर्स की व्यवस्था करने का अनुरोध किया. इस पर कथित तौर पर प्रबंधन ने नवजात को निजी खर्च पर ले जाने की बात कही. शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अस्पताल प्रबंधन ने एक पुरानी एंबुलेंस उपलब्ध कराई. नवजात को लेकर टीएमएच जाते समय एंबुलेंस में तेल नहीं था, जिसके कारण गोलमुरी स्थित पेट्रोल पंप पर रुककर तेल भरवाना पड़ा. शिकायतकर्ता का दावा है कि इस दौरान गंभीर रूप से बीमार नवजात को समय पर उपचार मिलने में बाधा उत्पन्न हुई. राजेश सांडिल के मुताबिक, टीएमएच पहुंचने पर वहां के चिकित्सकों ने नवजात की गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल उपचार की आवश्यकता बताई. उन्होंने आरोप लगाया कि मर्सी अस्पताल में समय पर आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं और बेहतर रेफरल व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराए जाने से नवजात की जान जोखिम में पड़ सकती थी. (नीचे भी पढ़ें)
आदिवासी गरीब महिला के लिए नर्सरी सुविधा नहीं देने का आरोप : शिकायतकर्ता ने अस्पताल की नर्सरी सुविधा को लेकर भी सवाल उठाए हैं. उनके अनुसार, अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि साफ-सफाई के कारण नर्सरी बंद थी, जबकि शिकायतकर्ता का आरोप है कि नर्सरी खुली होने के बावजूद उन्हें बताया गया कि वह केवल टीकाकरण (टीकाकरण के लिए) उपलब्ध है और आदिवासी गरीब महिला के नवजात के उपचार के लिए उपलब्ध नहीं थी. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. (नीचे भी पढ़ें)
उपायुक्त के माध्यम से स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर से उच्चस्तरीय जांच की मांग : राजेश सांडिल ने उपायुक्त के माध्यम से स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी से मर्सी अस्पताल के प्रबंधन एवं संबंधित चिकित्सकों की भूमिका की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. उन्होंने शिकायत में इलाज के दौरान कथित लापरवाही, नवजात को रेफर करने की प्रक्रिया, एंबुलेंस में ऑक्सीजन एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता तथा नर्सरी सेवा से जुड़े मामलों की जांच कर उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया है. शिकायत की प्रतिलिपि पूर्वी सिंहभूम के सिविल सर्जन, जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय, जमशेदपुर पूर्व की विधायक पूर्णिमा साहू और जुगसलाई के विधायक मंगल कालिंदी को भी भेजी गई है.



