रांची: बजट सत्र के दौरान गोड्डा में पावर प्लांट के लिए अडाणी को दी गयी जमीन को लेकर सदन में काफी बहस हुई. सरकार ने माना कि यह मामला गंभीर है. इस पर मंत्री दीपक बिरुवा ने कहा कि संथालपरगना में जमीन एसपीटी के अंतर्गत आता है, जो बिक्री योग्य नहीं है. आखिर किस परिस्थिति में सरकार ने अडाणी को यह जमीन दे दी. मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इस कमेटी बनेगी और इसकी जांच करायी जाएगी. एनर्जी पॉलिसी का भी आकलन किया जाएगा. इसके बाद समीक्षा होगी. तत्पश्चात कार्रवाई की जाएगी. इस मामले में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल ने कहा कि मामले की जांच के लिए कमिश्नर की अध्यक्षता में छह सदस्यीय कमेटी बनायी गयी है, जिसमे उपसमाहर्ता रैंक के अफसरों को शामिल किया गया है. (नीचे भी पढ़े)
कमेटी में कानून के जानकारों के साथ जनप्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए. इस पर प्रदीप यादव ने तंज कसते हुए कहा कि हम समझे थे कि कुर्ता बदल गया तो कहीं टोन भी बदल गया होगा. लेकिन आपका टोन नहीं बदला. प्रदीप यादव ने सरकार से पूछा कि क्या भू अर्जन में शर्तों का उल्लंघन हुआ है. क्या अडाणी को लाभ पहुंचाया गया है. एसपीटी का उल्लंघन हुआ है. या एनर्जी पॉलिसी का उल्लंघन हुआ है. इस पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.प्रदीप यादव ने रघुवर सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि गोड्डा जिला एवं पौडैयाहाट अंचल में अडाणी पावर लिमिटेड झारखंड द्वारा वर्ष 2017-2018 में स्थापित किया गया. तत्कालीन राज्य सरकार एवं अधीनस्थ पदाधिकारियों ने कंपनी के प्रभाव में आकर भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के प्रावधानों का उल्लंघन कर राज्य के कई प्रावधानित कानूनों को ढेंगा दिखाकर लाभ पहुंचाने का प्रयास किया.(नीचे भी पढ़े)
रातोंरात जमीन का दाम घटाकर 46 लाख प्रति एकड़ से 3.25 लाख प्रति एकड़ पुनः 12.5 लाख प्रति एकड़ किया गया.झारखण्ड राज्य ऊर्जा नीति-2012 के शर्त थी कि “राज्य के पावर प्लांट को 25% बिजली प्राथमिकता से राज्य को देना अनिवार्य है” को दरकिनार कर पूरी बिजली बंगलादेश को देने का एकरारनामा किया गया.एसपीटी एक्ट के प्रावधान के प्रतिकूल निजी कंपनी को जमीन अधिग्रहित कर दिया गया. जबकि एसपीटी पब्लिक परपरस के लिए जमीन अधिग्रहण की अनुमति देती है.एमओयू में प्रावधानित है कि ऑस्ट्रेलिया देश के कोयले पर बिजली का उत्पादन पावर प्लांट में होगा. लेकिन स्थानीय बंगाल एवं अन्य राज्यों के कोयले से बिजली उत्पादन किया जा रहा है. वन-भूमि का अधिग्रहण कर, गोचर एवं श्मसान घाट की जमीन अधिग्रहण कर संयत्र को स्थापित किया गया. लेकिन आज तक बदले में न तो उस क्षेत्र को वन-भूमि, गोचर एवं श्मसान घाट के जमीन का मिलना एसपीटी के प्रावधानों के विपरीत काम किया गया.



