देवघर : देवघर प्रखंड अंतर्गत दिघरिया गांव के निवासी घनश्याम यादव बंजर जमीन पर फूल की खेती कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं. त्योहारों वह शादियों के सीजन में बाजार में फूलों की मांग बढ़ जाती है, जिससे उनकी आय में और अधिक वृद्धि होती है. एक किसान द्वारा अपनी मोहनत और सकारात्मक सोच के बल पर जीवन बेहतर बनाने का यह एक अच्छा उदाहरण है. वे दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा के स्रोत बन सकते हैं. क्षेत्र के अन्य किसान भी अब धीरे-धीरे फूलों की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं. किसानों को विशेष रूप से गुलाब की खेती काफी रास आ रही है. गुलाब की खेती करनेवाले किसानों का कहना है कि इस फसल में लागत कम और मुनाफा अधिक है. इस फसल के खराब होने का भी डर नहीं रहता. (नीचे भी पढ़ें)

क्षेत्र के कई किसान गेंदे की खेती कर आत्मनिर्भर बन रहे हैं, क्योंकि यह कम लागत में अधिक मुनाफा देता है. इन फूलों की मांग भी काफी रहती है. गेंदे की मांग पूजापाठ, सजावट और औषधीय उपयोग के लिए हमेशा रहती है. घनश्याम यादव फूलों की खेती कर आत्मनिर्भर बन गए हैं. घनश्याम ने बताया कि वे कैसे तैयार करते है गेंदे के फूल और किस तरह उसे बाजार तक पहुंचते हैं. (नीचे भी पढ़ें)

उन्होंने बताया कि गेंदे की खेती के लिए वे ऐसी तैयारी करते हैं कि अक्टूबर-नवंबर तक उसकी फसल तैयार हो जाय. इसके लिए वे अगस्त में बिचड़े तैयार करते हैं, जिनके तैयार होने में एक महीने का समय लग जाता है. (नीचे भी पढ़ें)

उन्होंने बताया कि खेतों में सूखी गोबर-खाद डालकर खेत की जुताई करके तैयार करते हैं. खेत की मिट्टी मुलायम होने पर वह बिचड़े लगाने योग्य हो जाती है. सके बाद खेत में आयताकार क्यारियां बनाकर उनमें बिचड़े रोपे जाते हैं. फिर समय-समय पर उनकी सिंचाई करनी होती है, जिसके बाद एक से डेढ़ महीने में फूल के पौधे तैयार होते हैं. फूल तैयार होने के बाद व्यापारियों से संपर्क कर उनके हाथों फूल बेचे जाते हैं या बाजार तक भी पहुंचाये जाते हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें फूलों के बीज भी सरकारी स्तर पर जिला उद्यान केंद्र, देवघर से प्राप्त हो जाते हैं.



