
रांची : झारखंड विधानसभा में भाजपा विधायक मनीष जायसवाल ने मंगलवार को सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान अमर्यादित कदम उठाते हुए सदन के प्रोसीडिंग की ही कॉपी फाड़ दी. मनीष जायसवाल ने कहा कि इस सरकार में कुछ सुना नहीं जाता है. यह कहते हुए प्रोसीडिंट को फाड़ दिया. इसके बाद कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने विधानसभा की अवमानना मानते हुए इस पर कार्रवाई की मांग की. इसके बाद नाराज विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने कहा कि यह गलत कदम है और इसको लेकर कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने कहा कि सवाल भी लाते है, वेल में भी आते है, प्रोसीडिंग भी फाड़ते है, यह आचरन कैसा है. इसको किसी तरह बरदाश्त नहीं किया जायेगा. विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि ऐसे तो लोकतांत्रिक व्यवस्था सो ही ध्वस्त किया जा रहा है. यह आचरण अक्षम्य है. कहीं से भी इसको माफी लायक नहीं माना जाता है. इसके बाद भोजन का अवकाश हुआ और जब भोजनावकाश के बाद जब सदन की कार्रवाई शुरू हुई तो विधानसभा अध्यक्ष ने भाजपा विधायक मनीष जायसवाल को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया. अगले एक दिन तक वे सदन में नहीं रह सकेंगे. हालांकि, इस कार्रवाई का भाजपा विधायक सीपी सिंह ने विरोध किया और कहा कि किस नियम के तहत सस्पेंड किया जा रहा है. इस दौरान मनीष जायसवाल फिर से सदन में आये. लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने उनको मार्शल के माध्यम से बाहर का रास्ता दिखा दिया. (नीचे देखे पूरी खबर)

बिहार-उत्तर प्रदेश में झारखंडियों का सिर फोड़ा जाता है, मुख्यमंत्री ने सदन को चौकाया
मंगलवार को सदन में पाकिस्तान और बंग्लादेश को लेकर बहस हो गयी. भाजपा के विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा के एक सवाल पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि वे पाकिस्तान या बांग्लादेश के लिए मुख्यमंत्री नहीं बने हैं. मेरा काम सवा तीन करोड़ झारखंडियों की समस्याओं का समाधान करना है. नीलकंठ सिंह मुंडा ने सूचना के माध्यम से सवाल उठाया था कि प्रदेश में आदिवासी, दलित, चिकबराइक औरलोहरा समेत कई का जाति प्रमाण नहीं बन रहा है, लेकिन बांग्लादेशियों का जाति प्रमाण पत्र बन जा रहा है. मुख्यमंत्री ने भाजपा विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा के आरोपों का जवाब दिया और कहा कि आप काफी गंभीर विधायक है, लेकिन दुर्भाग्य है कि आप भाजपा में है. मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि 29 दिसंबर के बाद सभी सरकारी और निजी स्कूलों में स्पेशल ड्राइव चलाकर जाति प्रमाण पत्र बनाया जायेगा. सभी क्लास के बच्चों का प्रमाण पत्र बनाया जायेगा, चाहे वह किसी भी वर्ग के ही क्यों नहीं हो. इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड के लोगों पर बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में सिर फोड़ दिया जाता है. जाति प्रमाण पत्र की समस्या नयी नहीं है, यह पिछले 15 सालों की समस्या है. (नीचे देखे पूरी खबर)

जेपीएससी पर सदन में हंगामा होता रहा, सीपी सिंह और विरंची नारायण गायब रहे तो स्पीकर को आया गुस्सा
झारखंड लोकसेवा आयोग (जेपीएससी) पर एक बार फिर से भाजपा ने सदन के बाहर और अंदर जमकर हंगामा किया. इस दौरान सदन में हंगामा हुआ तो विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों को समझाया कि सदन के अंदर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सदन के अंदर सरकार का पक्ष रख दिया है. शीतकालीन सत्र के चौथे दिन की पहली पाली में सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के विधायकों द्वारा हंगामा पर विधानसभा अध्यक्ष ने लोगों को समझाया. भाजपा के विधायकों ने कहा कि वे लोग मुख्यमंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं है. वे लोग वेल में जाकर हंगामा शुरू कर दिया. जेपीएससी हाय हाय और हेमंत सोरेन सरकार होश में आओ नारे लगाये. इस दौरान लोगों ने कहा कि जेपीएससी की परीक्षा को रद्द किया जाना चाहिए और जेपीएससी के अध्यक्ष को हर हाल में बरखास्त कर दिया जाये. इस दौरान इन लोगों ने सीबीआइ जांच की मांग की. हंगामा के बीच ही अल्पसूचित प्रश्नकाल शुरू कर दिया गया. इस दौरान रांची से भाजपा विधायक सीपी सिंह सदन में नहीं थे. जब स्पीकर रवींद्रनाथ महतो ने सीपी सिंह को सरकार से जवाब मांगने के लिए पुकारा तो सदन में नहीं मौजूद थे. इस पर स्पीकर ने कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि सीपी सिंह कितने गंभीर है. अभी उनके पास मौका था कि वह सरकार से अपने सवाल का जवाब लेते. इसी दौरान भाजपा के मुख्य सचेतक विरंची नारायण का भी सवाल लाया गया और विरंची नारायण का नाम पुकार गया. लेकिन वे भी नहीं थे. इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह गलत है. लोग सवाल देते है और उसके बाद खुद गायब हो जाते है.




