
नयी दिल्ली/जमशेदपुर : बिहार के सिवान जिले के पूर्व सांसद और बाहुबली मोहम्मद शहाबुद्दीन की नयी दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में शनिवार की अहले सुबह मौत हो गई. वे नयी दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद थे जहां 21 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. बिहार में एक वक्त था जब उनकी निजी सेना चलती थी. शहाबुद्दीन पर पुलिसवालों, पत्रकारों, जज, वकील सबकी हत्या करने का आरोपी थे. लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल में उनकी तूती बोलती थी. उनका जलवा ऐसा था कि कोई कुछ बोलने की हिम्मत नहीं करता था और पुलिसवालों को भी उनसे डर ही था. उनके दुश्मन भी काफी थे. जिसको गोलियां या कानून कुछ नहीं कर सका उसको कोरोना ने मात दे दी और 6 फीट से भी लंबा थे और शारीरिक तौर पर भी मजबूत थे. लेकिन उनकी मौत हो गई.
1989 को जमशेदपुर के जुगसलाई गोलचक्कर में तीन लोगों को मार दिया गया था, शहाबुद्दीन थे आरोपी, 2017 में हुए थे बरी
02 फरवरी 89 की शाम 7.30 बजे जुगसलाई में तत्कालीन युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष प्रदीप मिश्रा, जनार्दन चौबे और आनंद राव की गोली मारकर हत्या की गई थी. प्रदीप मिश्रा के अंगरक्षक ब्रह्मेश्वर पाठक ने केस दर्ज कराया था. इसमें शहाबुद्दीन, रामा सिंह, साहेब सिंह, कल्लू सिंह व पारस सिंह समेत अन्य को आरोपी बनाया गया था. सीवान के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को तिहरे हत्याकांड में जमशेदपुर के एडीजे 4 अजीत कुमार सिंह की अदालत ने सोमवार को बरी कर दिया था. शहाबुद्दीन को तिहाड़ जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश किया गया. दस मिनट तक वह कोर्ट में ऑनलाइन मौजूद थे. तीन लोगों की हत्या के इस मामले में अदालत में कुल नौ गवाह पेश हुए थे. कोर्ट ने इस मामले में रामा सिंह समेत अन्य सभी आरोपियों को बरी कर दिया था लेकिन शहाबुद्दीन के पेश न होने के कारण उनके खिलाफ मामला लंबित रह गया था. इसी मामले के आरोपी साहेब सिंह को बिहार के रोहतास में पुलिस ने मुठभेड़ में मार दिया था, जबकि वीरेंद्र सिंह की उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में हत्या हो चुकी थी.





