
जमशेदपुर : सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एससीसीआइ) के अधिवक्ता एवं उपाध्यक्ष राजीव अग्रवाल तथा अधिवक्ता एवं सचिव अंशुल रिंगसिया ने 57वीं जीएसटी परिषद बैठक की प्रमुख सिफारिशों का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित बदलाव ईमानदार करदाताओं को राहत देने, अनावश्यक मुकदमेबाजी कम करने, अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाने और व्यवसायों के नकदी प्रवाह में सुधार करने में सहायक हो सकते हैं. इस बैठक में जीएसटी दरों में कोई सामान्य बदलाव प्रस्तावित नहीं किया गया है.

जुर्माने और अभियोजन में कमी: सामान्य जुर्माने को 25,000 रुपए से घटाकर 10,000 रुपए करने और अभियोजन की सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ करने का प्रस्ताव है. आवश्यक कानूनी संशोधनों के अधीन, 10,000 रुपए से कम के कर अंतर पर शो-कॉज नोटिस जारी न करने का प्रस्ताव है. इससे छोटी तकनीकी, लेखांकन, रिपोर्टिंग या मिलान संबंधी गलतियों के मामलों में व्यापारियों और व्यवसायों को राहत मिल सकती है, जहां कर चोरी का कोई इरादा नहीं होता. (नीचे भी पढ़ें)
वास्तविक मामलों में राहत : पात्र गैर-धोखाधड़ी वाले मामलों में यदि कर और ब्याज निर्धारित अवधि के भीतर जमा कर दिए जाते हैं, तो जुर्माने को 5% तक सीमित करने का प्रस्ताव है. उदाहरण के लिए, यदि कोई करदाता वास्तविक वर्गीकरण, रिपोर्टिंग या गणना संबंधी गलती स्वीकार करता है और निर्धारित समय के भीतर संबंधित कर एवं ब्याज जमा करता है, तो कम जुर्माने का लाभ मिल सकता है. इनपुट टैक्स क्रेडिट रोकने से पहले करदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर देने का भी प्रस्ताव है, जिससे वह चालान, भुगतान प्रमाण, मिलान विवरण और अन्य सहायक दस्तावेज प्रस्तुत कर सकेगा.इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) का विस्तार: कर्मचारी स्वास्थ्य और जीवन बीमा, आउटडोर कैटरिंग, मुफ्त नमूने तथा कानून के अनुसार नष्ट किए गए एक्सपायर्ड माल जैसे कुछ खर्चों पर आईटीसी की अनुमति देने का प्रस्ताव है, जो निर्धारित शर्तों के अधीन होगी. व्यवसायों को ऐसे क्रेडिट का दावा करने से पहले वैध चालान, कर्मचारी या ग्राहक रिकॉर्ड, आंतरिक अनुमोदन, स्टॉक नष्ट करने की रिपोर्ट और निर्धारित शर्तों के अनुपालन से संबंधित प्रमाण सुरक्षित रखने चाहिए. (नीचे भी पढ़ें)
जीएसटी रिफंड में तेजी: निर्यातकों और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर वाले व्यवसायों को तेज प्रोविजनल रिफंड का लाभ मिलने की उम्मीद है. पात्र इनपुट सेवाओं से संबंधित रिफंड और सरल दस्तावेजी प्रक्रिया का भी प्रस्ताव है. इससे उन निर्यातकों और निर्माताओं की कार्यशील पूंजी में सुधार हो सकता है, जिनकी इनपुट टैक्स दर आउटपुट टैक्स दर से अधिक है. व्यवसायों को निर्यात दस्तावेज, शिपिंग बिल, चालान, भुगतान प्रमाण और इनपुट सेवा रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखने चाहिए. (नीचे भी पढ़ें)
जीएसटी पंजीकरण और रिटर्न प्रक्रिया का सरलीकरण: कुछ पंजीकरण संशोधनों को स्वचालित रूप से संसाधित करने का प्रस्ताव है, जिससे व्यवसाय के पते, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं और अन्य पंजीकरण विवरणों में संशोधन से संबंधित देरी कम हो सकती है. परिषद ने रिटर्न से संबंधित गलतियों को सरल तरीके से सुधारने और अनुपालन पूरा होने के बाद पंजीकरण बहाल करने की प्रक्रिया को आसान बनाने की भी सिफारिश की है. हालांकि, करदाताओं को बहाली या सुधार के लिए आवेदन करने से पहले लंबित रिटर्न, कर भुगतान, ब्याज और विलंब शुल्क की स्थिति पूरी कर लेनी चाहिए. (नीचे भी पढ़ें)
माल परिवहन में राहत: निर्धारित परिस्थितियों और अधिकृत क्षेत्रों तक जांच सीमित करके मालवाहक वाहनों को अनावश्यक रूप से रोकने की घटनाओं को कम करने का प्रस्ताव है. फिर भी परिवहनकर्ताओं और आपूर्तिकर्ताओं को वैध टैक्स इनवॉइस, ई-वे बिल, डिलीवरी चालान और अन्य आवश्यक दस्तावेज साथ रखने चाहिए, ताकि वास्तविक माल की आवाजाही में अनावश्यक बाधा न आए. (नीचे भी पढ़ें)
महत्वपूर्ण अनुपालन परिवर्तन: कुछ स्क्रैप लेन-देन पर रिवर्स चार्ज और टीडीएस से संबंधित नई आवश्यकताओं का प्रस्ताव है. धातु, औद्योगिक, इलेक्ट्रॉनिक या अन्य निर्दिष्ट स्क्रैप का कारोबार करने वाले व्यवसायों को अपनी खरीद और बिक्री प्रक्रियाओं, विक्रेता दस्तावेजों, टैक्स इनवॉइस और लेखा प्रणालियों की समीक्षा करनी चाहिए. 5 करोड़ या उससे अधिक टर्नओवर वाले व्यवसायों को ई-इनवॉइसिंग के प्रस्तावित विस्तार की भी समीक्षा करनी चाहिए, जिसमें उनके बिलिंग सॉफ्टवेयर, इनवॉइस रिपोर्टिंग प्रक्रिया और मिलान नियंत्रण की तैयारी शामिल है. (नीचे भी पढ़ें)
राजीव अग्रवाल और अंशुल रिंगसिया ने कहा कि यदि ये प्रस्ताव लागू होते हैं, तो जीएसटी प्रशासन अधिक पारदर्शी और व्यापार-अनुकूल बन सकता है तथा व्यापारियों और उद्योगों पर अनुपालन का बोझ कम हो सकता है. उन्होंने व्यवसायों को सलाह दी कि अंतिम अधिसूचनाएं जारी होने से पहले वे अपने लेखा सॉफ्टवेयर, अनुबंधों, विक्रेता रिकॉर्ड, आईटीसी दस्तावेजों और आंतरिक जीएसटी नियंत्रणों की समीक्षा कर लें, ताकि बदलाव लागू होने के बाद उन्हें सुचारु रूप से अपनाया जा सके. उन्होंने स्पष्ट किया कि ये सिफारिशें हैं, तत्काल लागू कानून नहीं. संबंधित अधिसूचनाएं या कानूनी संशोधन लागू होने तक व्यवसायों को वर्तमान जीएसटी प्रावधानों का पालन जारी रखना चाहिए। अंतिम प्रभावी तिथि, पात्रता शर्तें, फॉर्म, प्रक्रिया और दस्तावेजी आवश्यकताएं सरकार द्वारा जारी अंतिम अधिसूचनाओं, परिपत्रों और संशोधनों पर निर्भर करेंगी. सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री व्यापारिक समुदाय की चिंताओं को उठाने और एक निष्पक्ष, सरल एवं पारदर्शी जीएसटी प्रणाली के समर्थन के लिए प्रतिबद्ध है.




